Tuesday, 6 September 2016

सविता चाची और पड़ोस की चुदासी आंटियाँ-1

हैलो फ्रेन्ड्स, मेरा नाम राघव है और अभी मैं 23 साल का हूँ। ये उस वक़्त की बात है जब मैं कोटा के एक कोचिंग इन्स्टिट्यूट में पीएमटी की तैयारी कर रहा था। उस वक्त मेरी उम्र 18 साल थी।
मैं उधर एक किराए के मकान में रहता था। मकान में तीन और स्टूडेंट्स रहते थे.
हम सब ग्राउंड फ्लोर पर रहते थे और फर्स्ट फ्लोर पर मकान-मलिक उनकी बीवी.. जिनका नाम सविता था, रहते थे।
उनका एक लड़का जयपुर के एक कॉलेज में था। उनकी एक लड़की भी थी जो इंटीरियर डिज़ाइनर थी.. उसकी शादी हो चुकी थी।
लैंडलार्ड सुबह ऑफिस जाते और शाम को आते थे.. और सविता चाची दिनभर घर में अकेली रहती थीं।
वो रोजाना सुबह 5-6 बजे नीचे फ्लोर की झाड़ू लगाने आती थीं.. तब मैं सोता रहता था।
सविता चाची 35 साल की थीं.. वो थोड़ी सी मोटी थीं और दिखने में औसत थीं।

सविता चाची ने मुझे नंगा देखा

मेरी आदत थी कि मैं कमरे में नंगा ही सोता था।
एक रात की बात है मैं अपने कमरे में नंगा सो रहा था.. तब लाइट चली गई।
कमरे में बहुत गर्मी हो रही थी.. तो मैंने उठ कर दरवाजा खोल दिया और परदा लगा कर सो गया।
नींद में मैं यह भूल गया कि मैं नंगा ही हूँ.
कुछ देर बाद लाईट आ चुकी थी.. लेकिन मुझे नहीं पता था।
सुबह जब चाची झाड़ू लगाने आईं.. तो उन्होंने मेरा दरवाजा खुला हुआ देखा। उन्हें लगा कि मैं जाग गया हूँ.. इसलिए वो कमरे के अन्दर आ गईं।
उन्होंने मुझे आवाज़ देकर मुझे जगाया और मेरी आँख खुल गई।
उस वक्त कमरे में अंधेरा था.. चाची ने लाईट ऑन की और पीछे मुड़कर देखा तो मैं बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था।
मैंने चाची की तरफ देखा तो चाची मेरी ओर देख रही थीं।
सुबह का वक़्त था इसलिए मेरा लंड बम्बू की तरह खड़ा था। ये सिर्फ़ 1-2 सेकेंड की बात थी.. सविता चाची के हाथ में उस वक़्त झाड़ू थी.. वो झट से पीछे मुड़ीं और परदा को साइड से हटाते हुए कमरे से बाहर चली गईं।
उस दिन फ्लोर का झाड़ू लगाना अधूरा ही रह गया। मैं उस दिन बहुत शर्मिंदा था.. लेकिन मैं मन ही मन खुश भी था क्योंकि किसी औरत ने मुझे आज पहली बार अपनी आँखों के सामने नंगा देखा है।
मैं जल्दी से तैयार होकर कोचिंग के लिए चला गया।
कुछ दिनों तक मैं चाची से नज़रें नहीं मिला पाया।
लेकिन महीने के अंत में मुझे किराया देना था। मैंने लैंडलॉर्ड को पैसे दिए लेकिन उन्होंने कहा- हर बार तो तुम अपनी आंटी को ही तो देते हो.. इस बार भी उन्हीं को दे देना.. क्योंकि मैं हिसाब नहीं रखता।
अब मैं क्या करता.. मजबूर था।
अगले दिन लैंडलॉर्ड की लड़की आई और बोली कि किराया मम्मी को दे देना और मैंने गर्दन हिला दी।
उसी रात को लैंडलॉर्ड और उसकी लड़की दिल्ली चले गए.. उनकी लड़की का कोई इन्टरव्यू था।
घर में चाची अकेली थीं और मैं डर रहा था कि चाची को पैसे कैसे दूँ।

पड़ोसन आन्टियों को नंगी देखा

मैं हिम्मत करके ऊपर गया.. लेकिन ऊपर मुझे कुछ औरतों के हंसने की आवाज़ आ रही थी और उन आवाजों में पॉर्न मूवी की आवाज़ भी शामिल थी।
मैं दबे पाँव दरवाजे की तरफ़ गया। मैंने कान लगा कर सुना.. सच में वहाँ ऐसी ही आवाजें आ रही थीं।
मैंने की-होल से अन्दर झाँक कर देखा तो पड़ोस वाली रचना और मेहता आंटी थीं.. जो एक-दूसरे के ऊपर नंगी लेटी हुई थीं।
मतलब वो लेज़्बीयन थीं।
यह देख कर मेरा दिमाग़ खराब हो गया।
मैंने फिर से की-होल में से देखा.. तो सविता चाची रसोई में से पानी की बॉटल और आइस-ट्रे लेकर आ रही थीं और उनके होंठों के बीच एक जलती हुई सिगरेट सुलग रही थी।
देखने वाली बात तो यह थी कि चाची सिर्फ़ पेटीकोट में थी और ऊपर से उनके बड़े-बड़े ब्राउन निप्पल वाले पपीते लटक रहे थे।
कसम से मेरा 6 इंच का लण्ड कुतुबमीनार बन कर पैन्ट में सख्त हो गया।
तभी नीचे से डोरबेल बजी.. मैं वहाँ से नीचे की और भागा..
सीढ़ियों से उतरते हुए मैंने देखा कि गेट पर नफ़ीसा आंटी खड़ी हुई थीं.. डोरबेल उन्होंने ही बजाई थी।
नफ़ीसा आंटी ने मुझे नीचे आते हुए देख लिया था।
उस दिन मैं हर आहट पर चौंकन्ना था। तीनों आंटी शाम के 5 बजे तक वहाँ रुकीं और फिर चली गईं।
तब मुझे पता चला कि तीनों आंटियां किस तरह की रंडियां हैं।
उस रात को मैंने 2 बार मुट्ठी मारी।
अब मैं उन आंटियों को चोदने का तरीका सोच रहा था.. तभी मेरे दिमाग़ में एक प्लान आ गया।
मैं उस रात को दरवाजा खुला रख कर 5 बजे का अलार्म लगा कर सोया और 5 बजे जाग कर सविता चाची के नीचे झाड़ू लगाने आने का वेट किया।
लेकिन आंटी 6:30 बजे तक नीचे नहीं आईं, मैंने गेट बंद कर लिया।
तब तक बाकी के स्टूडेंट्स भी कोचिंग के लिए जा चुके थे। ग्राउंड फ्लोर पर मैं अकेला ही रह गया था।

सविता चाची ने मेरा लंड पकड़ा

करीब 7 बजे मैंने चाची की पायलों की आवाज़ सुनी.. मैंने झट से दरवाज़ा खोला.. परदा लगाया और नंगा बिस्तर पर लेट गया।
मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं.. लेकिन थोड़ी सी खुली हुई रखी थीं.. ताकि मैं चाची को देख सकूं।
चाची मेरे कमरे के सामने से गुज़रीं.. लेकिन वो अन्दर नहीं आईं।
मेरे प्लान पर पानी फिर गया।
लेकिन दो मिनट बाद चाची गेट के सामने आईं.. परदा को हल्का सा हटाया ताकि वो कमरे के अन्दर देख सकें। मैं ये सब अपनी आधी खुली हुई आँखों से देख रहा था।
चाची को लगा कि मैं सो रहा हूँ, वो अन्दर आईं.. धीरे से और लाईट को ऑन किया।
उन्होंने कुछ मिनट तक मुझे बहुत गौर से नंगा देखा.. फिर मेरे लौड़े के पास अपनी नाक लेकर आईं.. और मेरे लौड़े को सूँघा।
फिर उन्होंने अपनी ब्रा में से मोबाइल निकाल कर शायद मेरा वीडियो बनाया या फिर फोटो खींचा.. मुझे पता नहीं।
इस समय वो अपने एक हाथ से लगातार अपने मम्मों को दबा रही थीं।
फिर वो बाहर चली गईं और ज़ोर-ज़ोर से अपनी पायल को बजाने लगीं। पास वाले कमरे का दरवाजा भी खटखटाया.. लेकिन मैंने आँख नहीं खोलीं।
वो शायद चैक कर रही थीं कि मैं इतनी आवाज से जागता हूँ या नहीं। वो फिर से कमरे में आईं.. लाईट बंद की और मुझे आवाज़ लगाई.. लेकिन पहले से जागे हुए आदमी कोई जगा सकता है क्या?
नहीं ना..
बस मैंने भी वही किया।
उन्हें लगा मैं बहुत गहरी नींद में हूँ।



थोड़ा चैक करने के लिए उन्होंने मेरे हाथ को टच किया.. फिर मेरी जाँघ पर हल्का सा हाथ फेरा।
उन्हें लगा कि ये नहीं जागेगा तो एक उंगली से उन्होंने मेरे लौड़े की स्किन को नीचे की ओर खिसका दिया। इससे मेरे लौड़े का सुर्ख लाल टोपा बाहर आ गया।
मेरा लंड फड़क रहा था और मेरी धड़कन बढ़ गई थीं।
उन्होंने मेरे लौड़े से निकली हुई पानी की कुछ बूँदों को उंगली से उठाया और फिर उसे चाट लिया।
बस फिर वो कमरे से निकल गईं।
अगर वो थोड़ी देर और ऐसा ही करती रहतीं.. तो मेरा तो निकल जाता।
उस दिन मैं कोचिंग के लिए नहीं गया। जैसे-तैसे अपने आपको रोका और मुट्ठी नहीं मारी, क्या पता चाची को चोदने का मौका कब मिल जाए।
मैं चाहता तो उसी टाइम चाची को पकड़ सकता था.. लेकिन मैं कुछ और ही चाहता था, मैंने सही टाइम का इंतज़ार किया।
दोपहर को लगभग 1:00 बजे रचना और मेहता आंटी आईं और ऊपर चली गईं।
मैं भी थोड़ी देर बाद ऊपर चला गया।

आंटियों को चोदने की तैयारी

वहाँ पर वही सब कुछ चल रहा था। मैंने अपने मोबाइल से वो वीडियो क्लिप बना ली.. इसी के साथ मैं इन आंटियों को एक साथ कैसे चोदूँ.. इसका तरीका मुझे एकदम दिमाग़ में आ गया।
मुझे पता था कि नफ़ीसा आंटी भी थोड़ी देर बाद आएँगी इसलिए मैंने डोरबेल का कनेक्शन काट दिया और नफ़ीसा आंटी का वेट करने लगा।
थोड़ी देर बाद वो आती हुई दिखाई दीं।
मैं भाग कर ऊपर चला गया। मुझे पता था कि आज डोरबेल नहीं बजेगी तो आंटी अपने आप ऊपर आ जाएंगी।
जो सोचा था वो ही हुआ।
नफ़ीसा आंटी ऊपर आ गईं और मैं दीवार के पीछे छुप गया। नफ़ीसा आंटी ने गेट नॉक किया.. अन्दर से सविता चाची ने पूछा- कौन है?
नफ़ीसा आंटी ने बोला- मैं हूँ नफ़ीसा।
सविता चाची ने पूछा- अकेली हो या और कोई है?
नफ़ीसा ने बोला- सिर्फ़ मैं ही हूँ।
इसके बाद मेहता आंटी ने गेट खोला लेकिन वो नज़ारा देखने लायक था। क्योंकि मेहता आंटी नंगी ही बाहर आ गई थीं। नफ़ीसा और मेहता आंटी आपस में गले मिलीं। मुझे इस ही मौके का इंतज़ार था.. मैं झट से बाहर आया और उन्हें पकड़ लिया।
वो एकदम से डर गईं। मेहता आंटी एकदम से घर के अन्दर भागीं और दरवाजा बंद करने की कोशिश करने लगीं।
मैंने दरवाजे को धक्का दिया और पूरा दरवाजा खोल कर खड़ा हो गया। मैंने अन्दर घुस कर नफ़ीसा आंटी का हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया।
ये सब देख के सारी आंटियों में अफ़रा-तफ़री मच गई और अपने आपको तौलिया.. बेडशीट और साड़ी आदि से ढकने लगीं।
इन सबके बीच में खड़ा हुआ मुस्कुरा रहा था।
सविता चाची ने बोला- ये क्या बदतमीजी है?
मैंने कहा- रिलॅक्स चाची.. मैं तो सिर्फ़ एंजाय करने आया हूँ। मैं इसके बारे में किसी को नहीं बताऊँगा।
चाची ने कहा- चले जाओ नहीं तो मैं..
मैंने उनकी बात काटते हुए कहा- चाची जी.. मैंने आपकी क्लिप मोबाइल पर बनाई है.. सो प्लीज़ मेरी बात मान लीजिए।
रचना आंटी जो लगभग 32 साल की थीं उन्होंने कहा- अरे सविता कोई बात नहीं.. मान ले बात.. वो किसी को नहीं बताएगा।
अब आंटियां करती भी तो भी क्या करतीं… उनकी पोल तो खुल ही चुकी थी।
सभी आंटियां असमंजस की स्थिति में थीं।
माहौल को खोलने के लिए सबसे पहले रचना आंटी सोफे से उठ कर खड़ी हुईं और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर सोफे पर बैठा दिया।
उन्होंने जो तौलिया लपेटा हुआ था, वो सिर्फ़ उनके आगे के बदन को ढक रहा था और वो पीछे से बिल्कुल नंगी थी, उनके बड़े-बड़े कूल्हे दिखाई दे रहे थे।
तौलिये से उनका सिर्फ़ आधा बदन कवर था.. इससे उनकी आधी जांघें सामने से दिखाई दे रही थीं.. जो मोटी और चिकनी थीं।
उनका रंग थोड़ा सा सांवला सा था, उन्होंने अपना तौलिया हटाया और सबके सामने बड़ी बेशर्मी से खड़ी हो गईं।
यह सब देख कर मेरा लंड फुंफकार मारने लगा।
इतनी ही देर में मेहता आंटी भी कॉन्फिडेन्स में आ गईं और साड़ी से ढके हुए अपने बदन को बंदिशों से बाहर कर दिया।
मेहता आंटी 30 साल की थीं और गोरा रंग उनको ताजमहल की परिभाषा देता था।
उनके निपल्स टाइट थे और चूत क्लीन शेव्ड थी। वो मेरे पास आकर बैठ गईं।
लेकिन नफ़ीसा आंटी अभी भी दरवाजे के पास ही खड़ी थीं, उन्होंने कहा- मैं जा रही हूँ.. मैं ये सब नहीं कर सकती।
उन्होंने गेट आधा खोला ही था कि सविता चाची उनकी तरफ भागीं। भागने के चक्कर में बेडशीट से ढका हुआ उनका गोरा बदन उघड़ गया। भागते समय उनके मोटे मम्मे.. बड़े-बड़े कूल्हे और गदराई हुई जांघें हिलोरे मारती हुई उछल रही थीं।
उन्होंने नफ़ीसा आंटी (26 साल) का हाथ पकड़ कर अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया।
उन्होंने कहा- अरे नफ़ीसा आ जाओ यार.. कुछ नहीं होगा.. वैसे भी इसे सब पता चल गया है और इसके पास हमारी वीडियो क्लिप भी है। सेफ्टी के लिए मेरे पास भी इसकी वीडियो क्लिप है।
यह सुन कर मैं हैरान हो गया।
अब मुझे पता चल गया कि चाची ने सुबह मेरा वीडियो बनाया था।
मैं भी अब किसी को कुछ बताने लायक नहीं रहा।
यह सुन कर नफ़ीसा आंटी पास की चेयर पर मुँह लटका के बैठ गईं।
मेहता आंटी ने कहा- मुझे भी दिखाओ इस लड़के का वीडियो?
रचना आंटी ने कहा- अरे छोड़ो यार हम तो इसे लाइव ही देख लेंगे।
यह कहते हुए उन्होंने मेरे गाल पर हाथ फेरा।
फिर उन्होंने एक सिगरेट जलाई और धुआं मेरे चेहरे पर छोड़ते हुए कहा- क्यों बेटा, मज़े करोगे हमारे साथ..
मैंने गर्दन हिला दी।
फिर मेहता आंटी ने अपनी दोनों जांघें फैला कर अपनी चूत दिखाई.. जो एकदम क्लीन शेव्ड और फूली हुई थी।
उन्होंने मेरी गर्दन को झटके से नीचे किया और चूत की तरफ ले गई, उन्होंने कहा- चाटो इसे..
मैं उनकी चूत को चाटने लगा और रचना आंटी मेहता आंटी के मम्मों को दबाने लग गईं।
मेहता आंटी चिल्लाने लगीं- आअहह.. ऊओ ईआहह उम्म्मह..
रचना आंटी ने कहा- अभी नए हो बेटा.. मैं तुम्हें चूत चाटना सिखाती हूँ।
उन्होंने सविता चाची को सोफे पर लिटा दिया और दोनों जांघें फैला कर अपनी जीभ को घुमाते हुए चूत के अन्दर-बाहर करके चाटना चालू कर दिया।
यह सब देख कर मेरा तो पूरा खड़ा हो चुका था। ये सब नफ़ीसा आंटी कुर्सी पर बैठ के देख रही थीं।
रचना आंटी आईं और मुझसे बोलीं- हम सब लेज़्बीयन हैं लेकिन आज एक छोकरा हमारा गैंग-बैंग करेगा। ये भी हमारा पहला एक्सपीरियेन्स होगा.. क्यों नफ़ीसा?
नफ़ीसा आंटी एकदम से चौंक कर बोलीं- आं..हाँ..हाँ..
‘तो फिर आओ ना.. वहाँ क्यों बैठी हो.. लाओ अपना बैग मुझे दो।’



नफ़ीसा आंटी का बैग खुला और उन्होंने उसमें से 4 डिल्डो निकाले। सभी आंटियों ने एक-एक डिल्डो ले लिया और उसे चाट कर गीला करने में लग गईं।
मेहता आंटी उठीं और नफ़ीसा आंटी का हाथ पकड़ कर मेरी गोद में बैठा दिया और मेरा हाथ उनकी जाँघों पर रख दिया।
नफ़ीसा आंटी सलवार कुर्ते में थीं। मेरा लंड उनकी गाण्ड के ठीक नीचे वाइब्रेट कर रहा था.. जो वो महसूस कर रही थीं।
मैं तीनों आंटियों को तो पहले भी नंगी देख चुका था.. लेकिन नफ़ीसा आंटी को नहीं देखा था।
सविता चाची ने कहा- नफ़ीसा.. छोकरे के कपड़े उतारो।
वो खड़ी हुईं और मेरे शर्ट को और बनियान को उतार दिया।
अब वो मेरी बेल्ट खोलने लगीं, मैंने इसमें उनकी हेल्प की.. तो वो अपनी आँखें ऊपर करके मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दीं।
फिर उन्होंने मेरी पैन्ट की ज़िप और बटन खोल कर खींच कर निकाल दी।
चड्डी के ही अन्दर से मेरे लंड के आकार का पता चल रहा था।
बाकी तीनों आंटियां भी मेरे आस-पास खड़ी होके लंड के बाहर आने का इंतज़ार कर रही थीं और प्यासी लोमड़ी की तरह सब कुछ देख रही थीं।

कहानी जारी है।

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